Ramesh Kumar HUF
3 years 8 months ago
माननीय प्रधान मंत्री जी,
आज सुबह की घटना है।
मेरी धर्मपत्नी मुझे दूध लाने के लिए सिक्के दे रही थी। उस क्रम में एक रूपए का छोटा सिक्का मिल गया जिसे मैंने बाजार से लाया हुआ धा।
फिर क्या था। पहले की तरह उनका उलाहना सुनना पड़ा। परम्परानुसार मेरे शवयात्रा के पर छीटने के काम आएगा कह कर अलग रख लिया।
बात ऐसी है कि आज भी गांवो में यह रिवाज कायम है। छीटे गए सिक्कों को बच्चे चुनते हैं और माला बना कर दीर्घायु होने के लिए गले में पहनते हैं।
सिक्का प्रचलन असमय कौन रोकता है? मामले पर ध्यान देना चाहेंगे।
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