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Governance reforms for quality

Governance reforms for quality
Start Date :
Jan 22, 2015
Last Date :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
Submission Closed

This theme invites inputs of the various types of reform needed to create better governance structures in State Universities and Centrally Funded institutions that will help in ...

This theme invites inputs of the various types of reform needed to create better governance structures in State Universities and Centrally Funded institutions that will help in improving their academic quality.

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Showing 918 Submission(s)
Avinash Chander
Avinash Chander 11 years 2 months ago
"गुरुजन बन्धुओं को चाहिए कि सबसे पहले विद्यार्थियों को शिष्टाचार का व्यावहारिक पहलू मजबूत करें ! ‘सत्यं बद्; धर्मं चर ! (सत्य बोलें और धर्म पर रहें-चलें !)’ अध्ययन का मूलमन्त्र होना चाहिये । इसकी व्यावहारिकता पर सबसे कड़ी दृष्टि होनी चाहिये ।" विद्यार्थियों में सर्वप्रथम शिष्टता एवं सदाचारिता ही कूट-कूट कर भरनी चाहिये । विद्यार्थियों के नैतिक और चारित्रिक विकास से सम्बन्धित विषय-वस्तुयें भी होनी चाहिये ।
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Vidyatattvam_15
Vidya_6
VDA_13
Avinash Chander
Avinash Chander 11 years 2 months ago
विद्यार्थियों का समुचित विकास किस प्रकार हो, यह पूरी जिम्मेदारी गुरुजन बन्धुओं पर ही होना चाहिये । सुधारात्मक अनुशासन विद्यार्थियों पर बराबर रहना चाहिये । इसके साथ ही किसी भी पारिवारिक व्यक्ति को गुरुजन बन्धुओं के अनुशासन में दखल नहीं देना चाहिये । अपने पुत्र-पुत्रियों को गुरुजन बन्धुओं के निर्देशन में ही सदा रखना चाहिये ।
Monika Kawadia
Monika Kawadia 11 years 2 months ago
अध्ययन-अध्यापन और ज्ञान पर ही समाज का पूरा भविष्य आधारित है। अध्ययन-अध्यापन और ‘ज्ञान’ समाज सुधार और जीवोद्धार तथा सुखी-सम्पन्न समाज हेतु सर्वप्रथम सबसे महत्त्वपूर्ण एवं सभी के लिए ही एक अनिवार्यतः आवश्यक विधान है । विद्यार्थी ही भावी समाज का कर्णधार होता है।
Monika Kawadia
Monika Kawadia 11 years 2 months ago
"गुरुजन बन्धुओं को चाहिए कि सबसे पहले विद्यार्थियों को शिष्टाचार का व्यावहारिक पहलू मजबूत करें ! ‘सत्यं बद्; धर्मं चर ! (सत्य बोलें और धर्म पर रहें-चलें !)’ अध्ययन का मूलमन्त्र होना चाहिये । इसकी व्यावहारिकता पर सबसे कड़ी दृष्टि होनी चाहिये ।" विद्यार्थियों में सर्वप्रथम शिष्टता एवं सदाचारिता ही कूट-कूट कर भरनी चाहिये । विद्यार्थियों के नैतिक और चारित्रिक विकास से सम्बन्धित विषय-वस्तुयें भी होनी चाहिये ।
VTC_7
Vidya_5
Monika Kawadia
Monika Kawadia 11 years 2 months ago
विद्यार्थियों का समुचित विकास किस प्रकार हो, यह पूरी जिम्मेदारी गुरुजन बन्धुओं पर ही होना चाहिये । सुधारात्मक अनुशासन विद्यार्थियों पर बराबर रहना चाहिये । इसके साथ ही किसी भी पारिवारिक व्यक्ति को गुरुजन बन्धुओं के अनुशासन में दखल नहीं देना चाहिये । अपने पुत्र-पुत्रियों को गुरुजन बन्धुओं के निर्देशन में ही सदा रखना चाहिये ।
gobind
gobind 11 years 2 months ago
Awareness,Availability and Affordability of best institute is necessary right of every child. Not I or You judge which will be good for them, to get success in future.
megha tripathi
megha tripathi 11 years 2 months ago
गुरुजन बन्धुओं को चाहिए कि सबसे पहले विद्यार्थियों को शिष्टाचार का व्यावहारिक पहलू मजबूत करें ! ‘सत्यं बद्; धर्मं चर ! (सत्य बोलें और धर्म पर रहें-चलें !)’ अध्ययन का मूलमन्त्र होना चाहिये । इसकी व्यावहारिकता पर सबसे कड़ी दृष्टि होनी चाहिये ।" विद्यार्थियों में सर्वप्रथम शिष्टता एवं सदाचारिता ही कूट-कूट कर भरनी चाहिये । विद्यार्थियों के नैतिक और चारित्रिक विकास से सम्बन्धित विषय-वस्तुयें भी होनी चाहिये ।
Pratik Chakraborty
Pratik Chakraborty 11 years 2 months ago
This is a concern regarding the opportunity to appear for JEE Advanced examination. Under previous HRD ministry Kapil Sibal, it was decided that based on the HSC (12th grade) marks and JEE Mains score (Cut off - 85% considering both the exams together.), a student would be allowed to appear for JEE Adv. Students are preparing for two long years to pursue education in an institution of their dreams - IIT. It is two long years of hard work and dedication for an admission to any one of these
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Pankaj ji
Pankaj ji 11 years 2 months ago
"गुरुजन बन्धुओं को चाहिए कि सबसे पहले विद्यार्थियों को शिष्टाचार का व्यावहारिक पहलू मजबूत करें ! ‘सत्यं बद्; धर्मं चर ! (सत्य बोलें और धर्म पर रहें-चलें !)’ अध्ययन का मूलमन्त्र होना चाहिये । इसकी व्यावहारिकता पर सबसे कड़ी दृष्टि होनी चाहिये ।" विद्यार्थियों में सर्वप्रथम शिष्टता एवं सदाचारिता ही कूट-कूट कर भरनी चाहिये । विद्यार्थियों के नैतिक और चारित्रिक विकास से सम्बन्धित विषय-वस्तुयें भी होनी चाहिये ।
Chunauti_4
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