Avinash Chander
11 years 2 months ago
"गुरुजन बन्धुओं को चाहिए कि सबसे पहले विद्यार्थियों को शिष्टाचार का व्यावहारिक पहलू मजबूत करें ! ‘सत्यं बद्; धर्मं चर ! (सत्य बोलें और धर्म पर रहें-चलें !)’
अध्ययन का मूलमन्त्र होना चाहिये । इसकी व्यावहारिकता पर सबसे कड़ी दृष्टि होनी चाहिये ।"
विद्यार्थियों में सर्वप्रथम शिष्टता एवं सदाचारिता ही कूट-कूट कर भरनी चाहिये । विद्यार्थियों के नैतिक और चारित्रिक विकास से सम्बन्धित विषय-वस्तुयें भी होनी चाहिये ।
Like
(0)
Dislike
(1)
Reply
Report Spam
