manish dwivedi
11 years 8 months ago
जिस तरह सांसदों को अपने रिश्तेदारों को कोई भी प्रशासनिक/मनोनीत पद ना देने की सलाह दी है, उसे ग्रामपंचायत स्तर तक लागू हॊना चाहियॆ . सारी योजनाओं के बाद भी ग्रामपंचायतें स्वतंत्रा रूप से काम नहीं करपा रहीं हैं। इसका एक कारण है परिवारवाद। यदि किसी पंचायत में महिला आरछण हाय तो चुनाव तो महिला ही जीतती है , लेकिन सरपंच की तरह ब्यवहार उस महिला का पति/पिता/भाई आदि करतें हैं। इसी तरह ये लोग अन्य मनोनीत सदस्य भी अपने ही परिवार से चुन लेते हैं।
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