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गुणवत्ता के लिए अभिशासन सुधार

Governance reforms for quality
आरंभ करने की तिथि :
Jan 22, 2015
अंतिम तिथि :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

इस विषय पर राज्य विश्वविद्यालयों और केन्द्र वित्तपोषित संस्थाओं ...

इस विषय पर राज्य विश्वविद्यालयों और केन्द्र वित्तपोषित संस्थाओं में बेहतर अभिशासन ढांचा बनाने हेतु विभिन्न प्रकार के अपेक्षित सुधारों, जो उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक हों, के लिए सुझाव आमंत्रित किए जाते हैं।

फिर से कायम कर देना
918 सबमिशन दिखा रहा है
SANDEEP KUMAR_61
SANDEEP KUMAR_61 11 साल 2 महीने पहले
We require a good monitoring system over Government school and Nagar Nigam School. Teacher should be going through every year with some training which will encourage for good result and improve their teaching skills. An Army officer should be available in the schools to make discipline habit of children’s in the school and his performance should be viewed closely by HOD/ officers of Army Take feedbacks from the children’s. Take feedbacks form the Teachers’.
RAJ VIR SINGH
RAJ VIR SINGH 11 साल 2 महीने पहले
श्रीमद्दयानन्द सरस्वती स्मारक ट्रस्ट टंकारा राजकोट गुजरात से शिक्षा प्राप्त करने के बाद जब मैं डी ए वी में धर्म शिक्षा अध्यापन करने आया तो मुझे छात्रों को यह समझाने में काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी कि माता-पिता और बड़ों के चरण स्पर्श करना आधुनिकता के खिलाफ़ नहीं l मैं २० वर्षों से इस आधुनिकतम शिक्षण संस्थान में धर्म शिक्षा, संस्कृत और हिंदी पढ़ा रहा हूँ l मैंने जो पढ़ा था वह इस आधुनिक शिक्षा से एकदम अलग था l ये यहाँ क्या और क्यों पढ़ाया जा रहा है कुछ पता नहीं ?
RAJ VIR SINGH
RAJ VIR SINGH 11 साल 2 महीने पहले
इस शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से देश के विरोध में मानव संसाधन तैयार किया जाता है l समस्त तथ्य विपरीत बनाकर पढ़ाए जा रहे हैं l यद्यपि डी ए वी संस्था महर्षि दयानंद का स्मारक है अतः यहाँ का पाठ्यक्रम काफी़ हद तक भारतीय संस्कृति और सभ्यता की पहल करता है खास कर धर्म शिक्षा में, पर नवीं और दशवीं में तो सी बी एस ई के पाठ्यक्रम ने चाहे वो विज्ञान का हो चाहे अंग्रेजी या फिर विशेषकर इतिहास का हो भारतीय संस्कृति के प्रति घृणा और हीनता का भाव उत्पन्न करता है l
RAJ VIR SINGH
RAJ VIR SINGH 11 साल 2 महीने पहले
नई शिक्षा नीति के लिए मेरे हिसाब से निम्न बिंदुओं पर अवश्य विचार-विमर्श किया जाना चाहिए - १- हमारी शिक्षा व्यवस्था हर ढंग से हमारी दिखनी चाहिए l उस पर विदेशी प्रभाव कदापि नहीं होना चाहिए l जिससे हमारे छात्र देशभक्त बनें l
RAJ VIR SINGH
RAJ VIR SINGH 11 साल 2 महीने पहले
२-संपूर्ण शिक्षा में मानव मूल्यों पर आधारित सत्यार्थ प्रकाश के द्वितीय समुल्लास के अनुसार शिक्षा होनी चाहिए l ३- रोजगार परक शिक्षा दी जानी चाहिए जिससे पाँचवीं पास भी अपना व्यवसाय शुरू कर सकें l ४-प्राइमरी शिक्षा क्षेत्रीय भाषाओं और मिडिल स्कूलों की शिक्षा हिंदी और मैट्रिक और ऊपर की शिक्षा हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में होनी चाहिए l
RAJ VIR SINGH
RAJ VIR SINGH 11 साल 2 महीने पहले
५- सामाजिक विज्ञान की शिक्षा हमारी प्राचीन सामाजिक/ सांस्कृतिक धरोहर की जानकारी देने के लिए होनी चाहिए न कि विदेशियों के दुराचारी व्यवहार का ज्ञान कराने के लिए l सभी प्रदेशों के महानायकों जैसे सरदार वल्लभ भाई पटेल, वीर शिवाजी, महाराणा प्रताप, महारानी लक्ष्मी बाई आदि का इतिहास प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए l 6- विज्ञान की शिक्षा ऐसी हो कि हमारे छात्र खुद कक्षा में वैज्ञानिक गतिविधियों का संपादन करें न कि पुराने फॉर्मूले रटते रह जाएँ l
RAJ VIR SINGH
RAJ VIR SINGH 11 साल 2 महीने पहले
७- हमारी शिक्षा नीति संसार के समस्त देशों के उदाहरण देखने के बाद उन सबमें सर्वोत्तम होनी चाहिए l ८- टेक्नॉलॉजी के सर्वोत्कृष्ट संसाधनों का और टीचिंग एड्स का भरपूर उपयोग किया जाना चाहिए l जिससे शिक्षा उबाऊ होने की बजाय रोचक बन सके l
RAJ VIR SINGH
RAJ VIR SINGH 11 साल 2 महीने पहले
मिडिल कक्षाओं से ही टेक्निकल एजूकेशन दी जानी चाहिए और बस्ते का बोझ हटाने के लिए टैब, ब्लैकबोर्ड हटाने के लिए प्रोजेक्टर तथा इंटरनेट के ऑडियो-वीडियो सिस्टम द्वारा दिल्ली मुख्यालय से प्रतिदिन ४ घंटे की शिक्षा सभी विद्यालयों में प्रसारित की जानी चाहिए l जिसमें विश्व के विद्वान अच्छी तरह निर्माण की गई पाठ्य सामग्री ही पढ़ाएँ l शंका समाधान भी मुख्यालय से ही हो पर विशेष शंका-समाधान विद्यालय स्तर के शिक्षक करें l प्रयोगाधारित शिक्षा पर जोर दिया जाना चाहिए l
RAJ VIR SINGH
RAJ VIR SINGH 11 साल 2 महीने पहले
९- परीक्षा और सार्टीफिकेशन में तो आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता है l परीक्षा लेखन की नहीं अपितु स्वभाव और कौशलों की होनी चाहिए और सार्टीफिकेट ऐसा हो कि सीधे नौकरी मिले या फिर स्वयं व्यवसाय करने में समर्थ हो l १०- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिक्षा के नाम पर व्यापार बंद होना चाहिए l संसार की सबसे सस्ती सेवा- शिक्षा का आदान-प्रदान होना चाहिए l