shivprakash mittal
5 साल 4 महीने पहले
हमारे देश के क़रीब एक करोड़ चाय क़ोफी की थड़ी वालों के पास कोई कमाई नहीं है क्योंकि लोकड़ाऊन के कारण उनका धंधा बिखर गया है और उनके पास दो टाईम की रोटी खाने का भी पैसा नहीं रहा. इन लोगों के पास कोई विकल्प नहीं है . बेचारे बेकार हो गए हैं. क्या आपके पास इनके लिए नौकरियाँ हैं. ज़रा सोच कर सोचिए. ये देश किस तरफ़ जा रहा है. क्या आपकी कोई ज़िम्मेदारी इनके प्रति है?
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