DadaLad
3 साल 3 महीने पहले
माननीय। प्रधान मंत्री श्री। नरेंद्र मोदी, कपास दुनिया को भारत की देन है। कपास का अर्थ होता है वस्त्र। पूरे विश्व को सँवारने का श्रेय अकेले भारत को प्राप्त है। बीटी कपास 2002 में उभरा। 2005 में, डबल जीन का आगमन हुआ और लाखों वर्षों तक यात्रा करने वाली कपास की किस्में गायब हो गईं।2002 बी.टी कपास आ गई और किसान प्रभावित हो गया। प्रारंभ में बिना छिड़काव के उत्पादन 10 से 15 क्विंटल होता है। बीज, छिड़काव, रासायनिक खाद पर भारी खर्च होता है। व्यय माइनस नॉमिनल आय रहता है। इसलिए किसान कपास की इस फसल करणे से दूर होते जा रहे हैं। कपास की जगह सोयाबीन को नकदी फसल के रूप में चुना गया है। हमारा देश कपास की इस फसल को छोड़ने का जोखिम नहीं उठा सकता है। तो क्या किसानों को देश के लिए घाटे में खेती करनी चाहिए ? इतना गंभीर प्रश्न उठना स्वाभाविक है । मैं पिछले 20 सालों से बीटी कपास पर अध्ययन कर रहा हु । मैंने इस कपास के बारे में बहुत सोचा है और इस विचार के परिणाम ने मुझे एक मौलिक संशोधन की ओर अग्रसर किया है । मेरे संशोधन से कपास की उत्पादकता डब्बल होती है इस मे कोई आश्चर्य नहीं । उत्पादकता दाई गुना भी बढ जाती
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